प्रेमचन्द साहित्य संस्थान
गतिविधि

‘कर्मभूमि’ के 10वें अंक का लोकार्पण

गोरखपुर, 25 मई 2022 । प्रेमचंद साहित्‍य संस्थान की अर्द्ध वार्षिक पत्रिका ‘कर्मभूमि’ के अंक 10 का, आज शाम 5 बजे प्रसिद्ध कथाकार प्रोफेसर रामदेव शुक्‍ल द्वारा लोकार्पण किया गया। प्रेमचंद साहित्‍य संस्‍थान के निदेशक प्रो सदानन्‍द शाही, सचिव प्रो राजेश मल्‍ल, प्रो अनिल राय और कोषाध्‍यक्ष नितेन अग्रवाल के अलावा गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सचिव श्री उदय प्रताप सिंह सहित नगर के अन्‍य प्रबुद्ध साहित्‍य प्रेमी नागरिकों और बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम सम्‍पन्‍न हुआ।

इस अवसर पर संस्‍था के निदेशक प्रो सदानन्‍द शाही ने कहा कि प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्‍यास ‘कर्मभूमि’ के नाम पर निकलने वाली
संस्‍थान की यह पत्रिका अपने शुरूआती दिनों में स्‍मारिका के रूप में प्रकाशित हो रही थी। अब यह संस्‍थान की अर्द्धवार्षिक पत्रिका के रूप में नियमित रूप से प्रकाशित होने लगी है। अबतक इसके कुल 10 अंक प्रकाशित हो चुके हैं। पत्रिका का उद्येश्‍य पाठकों को प्रेमचंद के साहित्‍य और चिंतन से जुडे विविध पहलुओं से परिचित कराना और प्रेमचंद के साहित्‍य में उनकी रूचि जाग्रत करना है। संस्‍थान की भावी योजना की चर्चा करते हुए प्रो शाही ने कहा कि प्रेमचंद की स्‍मृति को समर्पित इस संस्‍थान का लक्ष्‍य प्रेमचंद साहित्‍य के शोधार्थियों के लिए एक ऐसा ‘रिसोर्स सेंटर’ विकसित करना है जहां प्रेमचंद का समग्र और उनके रचनाकर्म पर हुए अद्यतन शोधों और लेखन आलोचन का विपुल साहित्‍य उपलब्‍ध हो।

उन्‍होंने बताया कि रिसोर्स सेंटर को औपचारिक आधार दिया जा चुका है। यद्यपि अभी यह अपने आरम्भिक चरण में है,लेकिन प्रेमचंद
का समग्र साहित्‍य संकलित किया जा चुका है। मंगलसूत्र, प्रतिज्ञा, कर्मभूमि,निर्मला और सेवासदन उपन्‍यासों के प्रथम संस्‍करण की फोटो प्रतियां संस्‍थान के रिसोर्स सेंटर में उपलब्‍ध है और अन्‍य उपन्‍यासों के प्रथम संस्‍करण की प्रतियां हासिल करने का प्रयास जारी है।

प्रो शाही ने बताया कि संस्‍थान के रिसोर्स सेंटर का अपना एक निजी वेबसाइट होगा। इसपर काम तेजी से हो रहा है और 31 जुलाई 2022 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर इसे विधिवत लांच कर दिया जाएगा। प्रेमचंद का समग्र साहित्‍य डिजिटल फार्म में उपलब्‍ध कराना और देश भर में प्रेमचंद पर होने वाले शोधों और चिंतनात्‍मक क्रियाकलापों को वेबसाईट पर उपलब्‍ध कराया जाता रहेगा।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित गोरखपुर प्राधिकरण के सचिव  उदयप्रताप सिंह ने प्रेमचन्द के कृतियों की चर्चा करते हुए कहा वे आज भी हिन्दी के सबसे मूल्यवान लेखक हैं और प्रेमचन्द की कर्मभूमि गोरखपुर से उन पर केन्द्रित पत्रिका का प्रकाशन शुभ है।उन्होंने कहा कि प्राधिकरण प्रेमचन्द की कर्मभूमि रहे गोरखपुर में उनकी स्मृति को और बेहतर बनाने के लिए कृत संकल्पित है।
अपने अध्‍यक्षीय भाषण में, संस्‍था के अध्यक्ष प्रो रामदेव शुक्‍ल ने विकास प्राधिकरण के सचिव के आश्‍वासन पर खुशी व्‍यक्‍त की और कहा कि उनका आश्‍वासन संस्‍था को सम्‍बल प्रदान करेगा। कार्यक्रम के आरंभ में कर्मभूमि के सह सम्पादक कपिलदेव ने पत्रिका के प्रारूप का परिचय दिया तथा अंत में संस्‍था के कोषाध्‍यक्ष नितेन अग्रवाल ने संस्‍थान की ओर से सबको धन्‍यवाद ज्ञापित किया।

 

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