प्रेमचन्द साहित्य संस्थान
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‘ बुद्ध की धरती पर कविता ‘ और ‘ केदारनाथ सिंह सम्मान ’ का आयोजन 3-5 मार्च को सारनाथ में

वाराणसी। ‘ बुद्ध की धरती पर कविता ‘ के चौथे संस्करण और ‘ केदारनाथ सिंह सम्मान ‘ का आयोजन 3,4 और 5 मार्च को सारनाथ में किया गया है। तीन मार्च को केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान का आयोजन होगा जिसमें लवली गोस्वामी (हिन्दी ) और प्रथीश (मलयालम)को दूसरा ‘केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान’दिया जाएगा। इसी दिन केदारनाथ सिंह की कविताओं को तेलुगु में अनुदित करने वाले और केदारनाथ सिंह की कविताओं पर विस्तृत आलोचना लिखने वाले के सत्यनारायण को पहला ‘ केदार के लोग ‘ सम्मान दिया जाएगा। इसके बाद 4 और 5 मार्च को बुद्ध की धरती पर कविता कार्यक्रम होगा जिसमें वरिष्ठ कवि अरुण कमल, नरेश सक्सेना, अनामिका, उदय प्रकाश, रमाशंकर सिंह, आनंद कुमार, राधावल्लभ त्रिपाठी, वैभव सिंह सहित की कवि भाग लेंगे।

दोनों आयोजन प्रेमचंद साहित्य संस्थान, साखी पत्रिका और उच्च तिब्बती संस्थान,सारनाथ द्वारा किया जा रहा है।

प्रेमचंद साहित्य संस्थान के निदेशक प्रो सदानंद शाही ने बताया कि हिंदी की साहित्यिक पत्रिका ‘साखी’ ने कवि केदारनाथ सिंह की याद में वर्ष 2021 से दो युवा कवियों को हर साल ‘केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान’ देने का निर्णय लिया था। इसके अंतर्गत एक हिन्दी कवि और एक अन्य भारतीय भाषा के कवि को सम्मानित किया जाता है।

हिन्दी में सुश्री लवली गोस्वामी को यह सम्मान उनके कविता संग्रह ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’(2019) के लिए दिया जाएगा। भारतीय भाषाओं में यह सम्मान इस वर्ष मलयाली कवि प्रथीश को उनके संग्रह ‘पीरवेल्लम’ (2020) के लिए दिया जा रहा है। वर्ष 2022 के लिए श्री ए अरविंदाक्षन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय चयन समिति (चन्द्रकांत पाटिल,राजेश जोशी,अरुण कमल और सुश्री अनामिका) गठित की गई थी। इस वर्ष भारतीय भाषा मलयाली प्रतिनिधि श्री के. सच्चिदानंदन विशेष सदस्य के रूप में शामिल हुए और निर्णायक मंडल ने सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया।

दोनों कवियों को ₹25000 की राशि, प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

प्रो शाही ने बताया कि ‘बुद्ध की धरती पर कविता’-काव्य- या़त्रा बुद्ध की निर्वाण भूमि कुशीनगर से 2019 में शुरू हुई थी। इसके बाद यह आयोजन बुद्ध की जन्मभूमि लुंबिनी (2020) तथा बोधभूमि गया (2022) में आयोजित हुई। इस काव्य यात्रा की चौथी कड़ी 4-5 मार्च को सारनाथ में आयोजित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि हज़ारों वर्षों से बुद्ध भारतीय ही नहीं विश्व कविता,कला और स्थापत्य को प्रेरित और प्रभावित करते रहे हैं। हम बुद्ध की भूमि में एकत्र होकर कविता और कला की उस दुनिया का पुन: स्मरण ही नहीं बल्कि पुन:सृजन करना चाहते हैं। विश्व को अपने आलोक से आलोकित करने वाली मानवीय करुणा की धारा नये सिरे से अपने भीतर प्रवाहित होते अनुभव करना चाहते हैं। दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में हम हिन्दी ही नहीं भारतीय और विश्व कविता में बुद्ध की उपस्थिति पर विचार करेंगे।देश भर से आने वाले कवियों की बुद्ध केन्द्रित कविताओं में अवगाहन करेंगे और इस तरह अपने भीतर बुद्ध की अवतारणा करेंगे।

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