प्रेमचन्द साहित्य संस्थान
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आलेख

सेवासदन के सौ वर्ष :  स्त्री मुक्ति का भारतीय पाठ

सदानंद शाही
सदानन्द शाही    आज से सौ वर्ष पहले प्रेमचंद ने एक उपन्यास लिखा- सेवासदन। सेवासदन की याद आज केवल इसलिए नहीं आ रही है कि
गतिविधि

‘कर्मभूमि’ के 10वें अंक का लोकार्पण

एडमिन
गोरखपुर, 25 मई 2022 । प्रेमचंद साहित्‍य संस्थान की अर्द्ध वार्षिक पत्रिका ‘कर्मभूमि’ के अंक 10 का, आज शाम 5 बजे प्रसिद्ध कथाकार प्रोफेसर रामदेव
आलेख

प्रेमचंद की नज़र में राष्ट्र

एडमिन
गोपेश्वर सिंह ( राष्ट्र , राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद को लेकर इधर अक्सर बहस होती है। हमारे महान लेखक प्रेमचंद के इस विषय में क्या विचार
आलेख

प्रेमचंद को कैसे पढ़ें ?

सदानंद शाही
सुनने में यह थोड़ा विचित्र लग सकता है लेकिन है जरूरी सवाल । जरूरी इसलिए कि प्रेमचंद को पढ़ने की इतनी दृष्टियाँ हैं ,इतने विचार
गतिविधि

भारतीय किसान की मृत्यु का शोकगीत है ‘ गोदान ’ -प्रो गोपाल प्रधान

एडमिन
प्रेमचन्द जयंती पर ‘ प्रेमचन्द और किसान ’ पर व्याख्यान गोरखपुर, 31 जुलाई, 2017। प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के इतिहास में सबसे बड़े रचनाकार हैं। विषय
आलेख

प्रेमचन्द ने सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद गोरखपुर में दो महीने करघा संघ चलाया था

Manoj kumar Singh
प्रेमचन्द का गोरखपुर से गहरा सम्बन्ध है। उनके बचपन के चार वर्ष यहीं बीते तो जवानी के साढे चार वर्ष भी। वह गोरखपुर में पढे